दिल की परिशानी …

दिल की परिशानी …
मैं तो अभी तक नहीं सो गई …
मैं तो अभी तक कुछ नहीं खाई …
 
मैं तो अभी तक जग रही हूं …
मैं तो अभी तक रो रही हूं …
 
क्योंकि मेरे दिल में
परिशानी है …
क्योंकि मेरे जीवन में
सब गलती हो जाती है …
 
इतना ज़्यादा तकलीफ़ है …
इतना ज्यादा दुख है …
चिंता से मैं रोती हूं …
नींद नहीं आ जाती है …
 
इतने बुरे लोगों से
जिंदगी ने मुझे मिलाया …
इतना नीचे लोगों ने
सब मुझे गिराया …
 
ये सब कुछ मैं याद करके
किस को फिर बताऊ ?
मेरा दुख दूर करने
के लिए किस को बुलाऊँ ?
 
कैसे सब भूल जाउ मैं ?
भगवान, बताओ …
और शुरू से जीना
कासे मैं बनाऊ ?
 
25.03.2024
© उमा पार्वती पौड्याल
© Uma Parvati Poudyal
 
“अच्छा किया जो तोड़ दिया
तुमने दिल मेरा...
इसको भी बहुत गुरूर था
तुम्हारे प्यार पे …”
 
( अमन राज )